Detailed Notes on इतिहास
वस्तुतः बरनी की कृतियां ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य हैं तथा ये बाद के इतिहासकारों के लिए प्रेरक रही हैं। इलियट एवं डाउसन ने ‘भारत का इतिहास’ (तृतीय खण्ड) में बरनी के कई उद्धरण दिये हैं तथा डॉ॰ रिजवी ने उसकी कृति ‘तारीख-ए-फीरोजशाही’ का हिन्दी अनुवाद किया है। तारीख-ए-फीरोजशाही[संपादित करें]
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