Detailed Notes on इतिहास

वस्तुतः बरनी की कृतियां ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य हैं तथा ये बाद के इतिहासकारों के लिए प्रेरक रही हैं। इलियट एवं डाउसन ने ‘भारत का इतिहास’ (तृतीय खण्ड) में बरनी के कई उद्धरण दिये हैं तथा डॉ॰ रिजवी ने उसकी कृति ‘तारीख-ए-फीरोजशाही’ का हिन्दी अनुवाद किया है। तारीख-ए-फीरोजशाही[संपादित करें] प

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परंतु जब भारतीय पुरातात्विक विभाग ने इस घाटी की खुदाई की थी तब उन्हें दो पुराने शहर के बारे में पता चला था। मोहनजोदाड़ो हड़प्पा  – धूसर रंग के बर्तन की संस्कृति (१२००–६०० ई.पू.) तीन अभिषिक्त साम्राज्य (६०० ई.पू.-१६०० ई.) गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट साम्राज्य